सोशल मीडिया : अभिशाप या वरदान, Social Media: Curse or Boon

Social Media: Curse or Boon सोशल मीडिया : अभिशाप या वरदान



भूमिका आज के समय में सोशल नेटवर्किंग की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि युवा वर्ग हर समय इन्हीं में उलझा देखा जाता है और यदि किसी व्यक्ति का सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स पर प्रोफाइल मौजूद नहीं है, तो उसे तुरन्त पिछड़ा घोषित कर दिया जाता है। यह सच है कि आज की यान्त्रिक जीवन-शैली में किसी व्यक्ति के पास मिलने-जुलने के लिए पर्याप्त समय नहीं है और वह इन्हीं वेबसाइट्स का सहारा लेकर अपनी जान-पहचान के लोगों के साथ अन्तःक्रिया करता है, जिससे एक सीमा तक समाज में भाईचारा, सौहार्द्र, प्रेम आदि बढ़ाने में मदद मिलती है।




सोशल मीडिया की अवधारणा


 सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स इण्टरनेट पर उपलब्ध वह ऑनलाइन सेवा प्लेटफॉर्म या स्थान है, जो लोगों के बीच सामाजिक नेटवर्क या सम्बन्ध स्थापित करने में विशेष माध्यम की भूमिका निभाता है। ये वेबसाइट्स अपने रजिस्टर्ड प्रयोक्ताओं को उनके नेटवर्क के ज़रिए उनके विचार, गतिविधियों एवं रुचियों को साझा करने जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराती हैं। फेसबुक, माईस्पेस (Myspace), ट्विटर (Twitter), बेबो (Bebo), इंस्टाग्राम इत्यादि कुछ प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स के उदाहरण हैं।



उल्लेखनीय है कि वर्ष 1969 में इंटरनेट का आविष्कार सूचनाओं को सुरक्षित रूप से साझा करने के उद्देश्य को ध्यान में रखकर किया गया था। तकनीकी प्रगति के साथ-साथ इसमें महत्त्वपूर्ण परिवर्तन होते रहे और 20वीं सदी के अन्तिम दशक में विश्वव्यापी संजाल (world wide web) पर ऑनलाइन सोशल नेटवर्किंग की संकल्पना साकार हुई।




वर्ष 1995 में प्रस्तुत की गई वेबसाइट क्लासमेट्स डॉट कॉम (classmates.com) ने लोगों को ई-मेल एड्रेस के ज़रिए आपस में जुड़ने का एक भिन्न एवं आसान माध्यम उपलब्ध कराया है। वर्तमान में सभी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स इसी तकनीक का प्रयोग करती हैं।


कोई व्यक्ति जब किसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर अपने आपको रजिस्टर करता है, तो उस वेबसाइट पर उस व्यक्ति का एक अकाउण्ट तैयार हो जाता है, जिसमें उसका पूरा प्रोफाइल मौजूद रहता है। उसके पास अपनी इच्छानुसार अपने बारे में जानकारियाँ उस वेबसाइट पर सार्वजनिक करने या गुप्त रखने के विकल्प रहते हैं।


सोशल मीडिया एक वरदान


 सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से लोग अपने से जुड़ी खबरों एवं घटनाओं के बारे में अपने मित्रों एवं सम्बन्धियों को जानकारी तुरन्त उपलब्ध करवा देते हैं। इसके माध्यम से लोग एक-दूसरे से बातचीत (चैटिंग) करके आवश्यक एवं ताजी जानकारी अपने शुभचिन्तकों तक पहुँचा सकते हैं। पूरी दुनिया कुछ क्षणों में ही उस जानकारी से अच्छी तरह परिचित हो जाती है। अधिकतर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स अपने प्रयोक्ताओं को उनके मित्रों एवं सम्बन्धित समुदायों की व्यवस्थित सूची की सुविधाएँ प्रदान करती हैं, जिससे उनसे सम्पर्क स्थापित करना सरल हो जाता है। कुछ सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स; जैसे—फेसबुक की सबसे बड़ी खूबी है, यहाँ ढेरों ऑनलाइन अनुप्रयोग व खेलों की उपलब्धता।

इनमें से बहुत से खेलों; जैसे-पोकर, फार्मविले इत्यादि को प्रयोक्ता अपने मित्रों के साथ भी खेल सकते हैं। अधिकतर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स अपने प्रयोक्ताओं को उनके प्रोफाइल में असीमित संख्या में फोटो एवं वीडियो अपलोड करने की  सुविधा भी उपलब्ध कराती है। प्रयोक्ता चाहे तो अपने, अपने परिवार, दोस्तों और दूसरों के लिए एलबम भी बना सकता है तथा किसी फोटो पर टिप्पणी भी लिख सकता है। कई सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स ब्लॉगों से जुड़ने की सुविधा भी प्रदान करती हैं, जिससे प्रयोक्ता को अभिव्यक्ति का एक बेहतर, सरल एवं सस्ता मध्यम मिल जाता है।



सोशल मीडिया एक अभिशाप 


दिन-प्रतिदिन लोकप्रिय होती जा रही सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स, जहाँ व्यक्ति की पहचान का दायरा व्यापक करती हैं, वहीं इनसे जुड़े खतरे भी कम नहीं है। दुनियाभर में कई लोगों की ऑनलाइन पहचान को हैकरों ने चुरा लिया। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अधिक-से-अधिक समय बिताने के कारण व्यक्ति अपने वास्तविक जीवन से कट जाता है। इसके अधिक उपयोग के द्वारा व्यक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स का प्रयोग ध्यानपूर्वक करना चाहिए, क्योंकि कोई व्यक्ति अन्य व्यक्ति का यूज़रनेम व पासवर्ड जानकर दुरुपयोग कर सकता है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने मनुष्य को आलसी बना दिया है। इन साइट्स के माध्यम से अपराध अधिक होने लगे हैं। यही नहीं इनके द्वारा व्यक्ति किसी की निजी जानकारी को जानकर उसका गलत उपयोग कर सकता है। अनेक अवसरों पर सोशल नेटवर्किंग साइट ने विभिन्न मुद्दों पर लोगों को भड़काने के रूप में एक व्यापक मंच दिया है। आजकल इण्टरनेट पर आर्थिक लेन-देन के लिए पे-पैल और क्रेडिट कार्ड की सूचनाएँ ई-मेल के साथ सामान्यतया जुड़ी रहती हैं



अन्ततः कहा जा सकता है कि सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स लोगों में अधिक-से-अधिक अन्त:क्रिया सम्भव बनाकर समाज में भाईचारा, सौहार्द्र, मित्रता आदि बढ़ाने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


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