देशाटन से लाभ benefit from expatriation

benefit from expatriation     देशाटन से लाभ



भूमिका आदिकाल से ही मनुष्य की प्रवृत्ति भ्रमण की रही है, देशाटन से अभिप्राय देशों का भ्रमण करना ही है। देशाटन से हमें अनेक प्रकार के अनुभव प्राप्त होते हैं। देशाटन के समय हम भिन्न-भिन्न देशों का भ्रमण करते हैं, वहाँ की सभ्यता, संस्कृति से अवगत होते हैं, जिससे हमें उनको वेशभूषा रहन-सहन का

ज्ञान होता है। मनुष्य के मन में नई चीजों को जानने की सदैव जिज्ञासा रहती है और मनुष्य की यह जिज्ञासा प्राय: देशाटन से ही पूर्व होती हैं।



ज्ञानर्जन के लिए आवश्यक

 पुस्तक ज्ञान हमे कर्म क्षेत्र में सहायता प्रदान करता है, किन्तु हमारे दैनिक और सामान्य जीवन में सामाजिकता का ज्ञान प्रायः देशाटन के द्वारा ही प्राप्त होता है। यह एक ऐसा ज्ञान है, जिसके द्वारा मनुष्य विभिन्न लोगों से परिचित होता है, उनके विचारों को जानता है और विभिन्न परिस्थितियों में परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढालने और तैयार कर पाने में सक्षम होता है। देशाटन से मनुष्य को कई प्रकार के स्थानों को देखने का शुभ अवसर प्राप्त होता है तथा अनेक नए विचार उत्पन्न होते हैं।



मन की प्रसन्नता

 का हमारे स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। कई स्थान ऐसे भी होते हैं, जिनकी जलवायु स्वास्थ्य को लाभ पहुँचाती है। प्राय: देखा जाता है कि देशाटन के समय हम पारिवारिक चिन्ताओं से मुक्त रहते हैं और दफ्तर की दैनिक उलझनों को दरकिनार कर देते हैं और बस उसी स्थान के होकर रह जाते है। अत: देशाटन से मनुष्य के स्वास्थ्य को भी काफी सीमा तक लाभ पहुंचता है।



दृष्टिकोण विस्तृत होता है

 देशाटन से हमारा दृष्टिकोण विस्तृत होता है। इससे

हमारे विचारों और दृष्टिकोणों में उदारता आती है। इसके द्वारा हमारे मन में मानवता के प्रति सहानुभूति जागृत होती है। देशाटन के द्वारा हमारे मन में विश्व बन्धुत्व की भावना का विकास होता है। विविध प्रकार का अनुभव पाकर हम घटनाओं और वस्तुओं को एक नई दिशा से देखना सीख जाते हैं। इससे मूल्यों के प्रति हमारा सही दृष्टिकोण विकसित होता है।



पर्यटन को बढ़ावा

 पर्यटन मन्त्रालय ने भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2002 में 'अतुल्य भारत (इन्फ्रेडेबल इण्डिया) अभियान' की शुरु आतकी। इसके अन्तर्गत भारत की पर्यटन सम्बन्धी विशिष्टताओं का विज्ञापन 'अतुल्यरत' के नाम से प्रिण्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से किया जा रहा है। विश्वभर में इस प्रचार अभियान ने भारत को एक ऐसे पर्यटन स्थल के रूप में दर्शाया है, जिसमें कला प्रेमियों, संस्कृति प्रेमियों, फ़िल्म प्रेमियों और रोमांच की तलाश में निकले पर्यटकों की खासी दिलचस्पा पैदा हुई। यही नहीं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मन्त्रालय ने पुरानी हवेलियों, किलों व दुर्गों के अतिरिक्त वर्ष 1950 से पूर्व निर्मित आवासीय भवनों में चल रहे होटलों के लिए 'हेरिटेज होटल' नाम का नया वर्ग बनाया।



व्यापार और विदेशी मुद्रा में बढ़ावा 

भारत में ऐतिहासिक स्थलों की कोई कमी नहीं है। यहाँ प्रत्येक वर्ष लाखों पर्यटक देशाटन के लिए आते हैं, जिससे हमारे पर्यटन सम्बन्धी व्यापार को काफी लाभ मिलता है। निजी सम्पर्क से नए व्यापारों का सूत्रपात होता है। इस तरह भ्रमण द्वारा व्यापार को बढ़ावा मिलता है।



 देशाटन का पूरा लाभ उठाने के लिए हमें यात्रा के दौरान अपनी आँखें और कान खुले रखने चाहिए तथा मन में सीखने की ललक होनी चाहिए। हम सभी को प्रत्येक वर्ष कम-से-कम एक बार देशाटन अवश्य करना चाहिए।

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